लेखनी कहानी -28-Jul-2024

                    शेर

कैद कर कफ़स में हमको खुद परिंदे सा वो उड़ता है।                            ज़माने का यही शौक हैं गरीबों को वो ऐसे ही छलता हैं।।

दिखता है ख़्वाहिशें आसमां की जमीं पे चलने भी नहीं देता है।                    यह कैसा चलन है दुनिया का हमारे होने का पता भी नहीं देता हैं।।            मधु गुप्ता "अपराजिता"

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